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जीवन में अधिकांश व्यक्ति का कोई ना कोई शत्रु अवश्य होता है। यह शत्रु किसी भी रूप में हो सकता है। कॅरियर में भी हो सकता है और निजी जीवन में भी। लेकिन सवाल यह है कि इन शत्रुओं को पहचानें कैसे। हस्तरेखा विज्ञान में शत्रु को लेकर हाथों में रेखाओं के बारे में बताया गया है। हाथ में मित्र और शत्रु दोनों रेखाएं होती हैं। हाथ में दो मंगल होते हैं। एक उच्च मंगल और निम्न मंगल का। हाथ में कनिष्ठा यानी बुध पर्वत के नीचे स्थित मंगल पर्वत पर मिलने वाली पड़ी रेखाएं शत्रु रेखाएं होती हैं। ये रेखाएं जितनी होंगी, शत्रुओं की संख्या भी उतनी ही होगी। यदि इनमें कोई रेखा बहुत लंबी है तो शत्रु आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं। 

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यदि यह रेखा लंबी होकर भाग्य रेखा को काट दे तो शत्रु आपको जीवन में बड़ा धोखा देगा और मोटा आर्थिक नुकसान पहुंचाएगा। उम्र के जिस भाग में शत्रु रेखा भाग्य रेखा को काटे उसी उम्र में नुकसान होता है। छोटी रेखाएं बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा पाती। यदि शत्रु रेखा पर द्वीप है तो यह संबंधित व्यक्ति के अनैतिक कार्यों में लिप्त होने को दर्शाता है। यदि हाथ में कमल का निशान है अथवा अन्य शुभ चिह्न हैं तो शत्रु रेखा होने के बावजूद वे आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। यदि शुक्र पर्वत के पास स्थित मंगल क्षेत्र से रेखाएं निकलकर जीवन रेखा को काटकर आगे बढ़े तो यह भी शत्रु रेखाएं हैं लेकिन यह आपके नजदीकी लोगों को दर्शाती हैं। कोई करीबी ही आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकता है

 (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

 

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