त्वमर्कस्त्वं सोमस्त्वमसि पवनस्त्वं हुतवह:

त्वमापस्त्वं व्योम त्वमु धरणिरात्मा त्वमिति च

परिच्छिन्नामेवं त्वयि परिणता बिभ्रति गिरं

हे शिव !!! आप ही सूर्य, चन्द्र, धरती, आकाश, अग्नि, जल एवं वायु हैं. आप ही आत्मा भी हैं. हे देव मुझे ऐसा कुछ भी ज्ञात नहीं जो आप न हों.


 

काशी के अनसुनी कहानी के समस्त पाठकगण को सादर प्रणाम हम लोग इस समय इस सीरीज के माध्यम से सूर्य के काशी में स्थित 12 स्थानों का महात्यम का अध्ययन कर रहे इसी क्रम में आज हम अरुणादित्य, बृद्धादित्य, केशवादित्य  के महात्म्य का अध्ययन करेंगे ।

 

Arunaditya

स्कंद जी कहते है जब विनीता के पुत्र अरुण जी जब काशी आये और यहां आकर उन्होंने भगवान सूर्य की आराधना की तो भगवांन सूर्य उनपर प्रसन्न हुए और और उन्हें अपना सारथी बना दिया और उन्हें अपने साथ ले गए । और उन्होंने कहा जो व्यक्ति यहां आकर रोज मेरा दर्शन एवं पूजन करेगा कभी भी उसे पाप , दरिद्रता की प्राप्ति नही होगी , एवम जो मनुष्य प्रतिदिन भगवान सूर्य को अरुण सहित प्रातःकाल नमस्कार करेगा उसके समस्त पाप नष्ट हो जाएंगे । इस महात्म्य को जो पड़ता है उसके दुख नष्ट हो जाते है ।

 

 

 

स्कंद जी कहते है – अब बृद्धादित्य का महात्म्य सुनो काशी में एक हारीत नामक वृद्ध हुए वो तपस्या कर के सूर्य देव को प्रसन्न किया और उनसे युवास्था का वरदान मांगा तब उन्होंने उसका कारण पूछा तब उन्होंने कहा कि तपस्या से बढ़कर कुछ नही है इसीलिए आप मुझे तपस्या करने के लिए युवावस्था प्रदान करे तब भगवान सूर्य ने उन्हें वैसा ही वरदान दिया और कहा कि मैं यहां पर वृद्धादित्य के नाम से निवास करूँगा एवं कोई भी मनुष्य यहां आकर मेरी पूजा करेगा उसके दुर्गति का नाश होगा । रविवार को केवल यहां आकर नमस्कार करने मात्र से बहुत सारे प्रकार की सिद्धि स्वयम प्राप्त हो जाती है । इस प्रकार से वृद्धादित्य का महात्म्य पूरा हुआ ।

 

Keshavaditya

स्कन्द जी कहते है – अब केशवादित्य का महात्म्य सुनो एक बार जब भगवान सूर्य पृथ्वी का भ्रमण कर रहे थे तो उन्होंने एक जगह पर केशव(भगवान विष्णु)को किसी की पूजा करते हुए देखा व्व आश्चर्य से उनके पास गए और उनसे पूछा आप त्रैलोक्य के अधिपति है आप किस कामना से और किसकी पूजा कर रहे है ,तब भगवान विष्णु ने उन्हें भगवान विश्वनाथ की महिमा बताई और कहा मैं उन्ही की पूजा कर रहा हु और उन्ही की कृपा से मनुष्य समस्त प्रकार के सुखोंका उपभोग कर सकता है ।

जब श्रीविष्णु के मुख से यह बात सुनी तो सूर्य देव वहां पर स्फटिक के शिवलिंग की स्थापना की जिसका नाम केशवादित्य रखा  और आज भी वो भगवान शिव की  पूजा वहां कर रहे है जो व्यक्ति अचला सप्तमी के दिन उनकी दर्शन पूजन करता है उसके कार्य बिना रुकावट हो जाते है और उसे भगवान सूर्य विष्णु और शिव का अनुग्रह प्राप्त होता है ।

 

 

 

ईस प्रकार आपके समक्ष आज अरुणादित्य, वृद्धादित्य, केशवादित्य का महात्म्य रखा शेष की चर्चा अगले भाग में होगी

प्रणाम

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