काशी विश्वनाथ धाम : महंत परिवार ने की शिवलिंग की रक्षा, महावीर की महंतई में चांदी के हुए चारों द्वार

[ad_1]

विश्वनाथ मंदिर की महंत परंपरा के बारे में जानने के साथ ही मंदिर से जुड़े कुछ खास तथ्यों को जानना भी जरूरी है। मूल आदिविश्वेश्वर मंदिर को सर्वप्रथम कुतुबुद्दीन ऐबक के शासनकाल में 1194 में तोड़ा गया। इतिहास साक्षी है मुगल आक्रांताओं के काल में विश्वनाथ मंदिर कई बार तोड़ा गया। हर बार कुछ समय के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर पुन: अस्तित्व में आता गया। ज्ञानवापी परिसर में बना भव्य आदिविश्वेश्वर मंदिर, जिसके प्रमाण स्वरूप ज्ञानवापी कूप, विशाल नंदी और परिसर के पश्चिमोत्तर में मौजूद ध्वंसावशेष अब भी उसी परिसर में विद्यमान हैं, को 1669 में औरंगजेब के फरमान के बाद मंदिर के महंत परिवार ने मूल शिवलिंग को पहले ही छिपा दिया। उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने को यह बात फैला दी कि एक अर्चक शिवलिंग लेकर ज्ञानवापी कूप में कूद गया।

आर्थिक राशिफल 13 दिसंबर: आज सिंह, तुला और कुम्भ राशि वाले नए निवेश में बरते सावधानी, जानिए बिजनेस व नौकरी से जुड़े कार्यों का शुभ समय

पं. महावीर प्रसाद तिवारी के कार्यकाल में ही विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह के चारों द्वारों को चांदी से मढ़वाया गया था। कालांतर मे गर्भगृह में उनका प्रस्तर चित्र भी बनवाया गया। 1938 से 1952 तक व्यवस्था संयुक्त रूप से चली। 1952 में पहली बार चार महंत बने। उनमें पं. रामशंकर त्रिपाठी, पं. विजय शंकर, पं. कृष्ण शंकर और अन्नपूर्णा देवी हैँ। 1960 में अन्नपूर्णा देवी के बाद उनके पुत्र पं. कैलाशपति तिवारी महंत बने। 1993 से उनके पुत्र डॉ. कुलपति तिवारी महंत हें। महाशिवरात्रि, रंगभरी एकादशी, श्रावणी पूर्णिमा और अन्नकूट पर होने वाले अनुष्ठानों में वह बाबा विश्वनाथ की सामवेद के दस अक्षरों वाले दीक्षित मंत्र से आराधना करते हैं।

राशिफल : ग्रहों की चाल से मेष, सिंह, धनु वालों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, हनुमान जी की शरण में रहें और केसर तिलक लगाएं

कार्तिक मास की बैकुंठ चतुर्दशी तिथि पर स्थापित काशी विश्वनाथ मंदिर में सप्तर्षि आरती की परंपरा अब भी महंत परिवार के सदस्य ही निभाते हैं। इस आरती

[ad_2]

Source link

0 replies

Leave a Reply

Want to join the discussion?
Feel free to contribute!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *