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Maa Sharda Shakti Across LoC: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 18 महाशक्तिपीठों में से एक शारदा पीठ है। मां शारदा पीठ सैकड़ों साल पुराना है। चौदहवीं शताब्दी तक कई बार प्राकृतिक आपदाओं से मंदिर को भारी क्षति पहुंची है। विदेशी आक्रमणों से भी इस मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा है। इस मंदिर की आखिरी बार मरम्मत 19वीं सदी के राजा गुलाब सिंह ने कराई थी। बीते 70 सालों से इस मंदिर में पूजा नहीं हुई है।

पीओके स्थित शारदा शक्तिपीठ प्राचीन काल से ही पूरे विश्व में हिंदुओं और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए शिक्षा का बड़ा केंद्र रहा है। यह पीठ नीलम और मधुमति नदी के संगम पर मुजफ्फराबाद से 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

मां शारदा के दर्शन का मामला-

भारतीयों को पीओके स्थित मां शारदा के दर्शन की इजाजत देने का मामला लंबे समय से चल रहा है। लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के कारण यह सुलझ नहीं सका है।

मंदिर से जुड़ा इतिहास-

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शंकर ने सती के शव के साथ जो तांडव किया था, उसमें सती का दाहिना हाथ इसी पर्वतराज हिमालय की तराई कश्मीर में गिरा था। मान्यता है कि यहां देवी का दायां हाथ गिरा था। यह मंदिर कश्मीरी पंडितों के तीन प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अन्य दो अनंतनाग में मार्तंड सूर्य मंदिर और अमरनाथ मंदिर है। कहा जाता है कि शारदा पीठ में पूजी जाने वाली मां शारदा तीन शक्तियों का संगम हैं। पहली शारदा (शिक्षा की देवी), दूसरी सरस्वती (ज्ञान की देवी) और तीसरी वाग्देवी (वाणी की देवी)।

मंदिर का महत्व-

हिंदू धर्म के अनुसार, नीलम नदी के किनारे पर स्थित इस मंदिर का महत्व सोमनाथ के शिवलिंगम मंदिर जितना ही माना गया है। हिंदू धर्म में देवी शक्ति के 18 महाशक्तिपीठों में से इसे एक माना गया है।

प्राचीन काल में शारदा पीठ भारत उपमहाद्वीप में सर्वश्रेष्ठ मंदिर विश्वविद्यालयों में से एक था। कहा जाता है कि शैव संप्रदाय के जनक कहे जाने वाले शंकराचार्य और वैष्णव संप्रदाय के प्रवर्तक रामानुजाचार्य दोनों ही यहां आए और दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की। 

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