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शास्त्रीय उल्लेख के अनुसार भाद्रपद मास अर्थात 13 अगस्त से 10 सितंबर तक कई अशुभ योग विश्व और प्रकृति में उथल-पुथल मचाने वाले हैं। भाद्रपद मास में पांच शनिवार और पांच रविवार का योग, शनि-शुक्र का समसप्तक योग, सूर्य और शुक्र युति का म्लेच्छ योग भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्य एवं देशों में हिंसा, युद्ध एवं प्राकृतिक घटनाओं का योग बना रहे हैं। सूर्य-शुक्र के म्लेच्छ योग से देश के अंदर दंगा-फसाद, राजनीतिक दलों का सत्ता दल पर आरोप-प्रत्यारोप, हिंसात्मक प्रवृत्ति एवं कट्टरता बढ़ने के योग बन रहे हैं। शास्त्रीय लेखों के अनुसार कविता के रूप में इन योग का इस प्रकार से फलादेश बताया गया है। 

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भादो मास में पांच शनि व रविवार। पूर्वोत्तर  दिशा में  बढ़े तकरार।। छत्र भंग या रण का आगाज। महंगे हों सब धान्य अनाज।। पूर्वोत्तर राष्ट्रों में हो शांति भंग। प्राकृतिक घटनाएं  दिखाएंगी रंग। शनि शुक्र का समसप्तक योग। भारत में बढ़े व्याधि और रोग।। अराजक तत्वों की हो भरमार। विश्व में फैले आतंकी व्यापार।। प्रकृति की भी हो दुष्कर चाल। मानवता हो जाए बेहाल।। सूर्य शुक्र युति का म्लेच्छ योग। कट्टरता,अराजकता का फैले रोग।। मांगे ईश्वर से यह वरदान। करो मानवता का कल्याण।

उपरोक्त फलादेश के अनुसार कई राष्ट्र आपस में टकराएंगे, युद्ध और हिंसा के बीच विश्व में जनधन की पर्याप्त हानि होगी। विश्व में आतंक भयावह रूप लेगा। यद्यपि कई देशों में आतंक में कमी भी आएगी, किंतु कुछ देश मात्र आतंकवाद निरोध का दिखावा करेंगे। प्राकृतिक घटनाएं जैसे भूकंप, चक्रवात, अतिवृष्टि एवं अग्निकांड के भी पर्याप्त योग बनेंगे। भारत में विपक्षी दल और अराजक तत्व हिंसा और अराजकता फैलाने का प्रयास करेंगे। वाद-विवाद एवं संसद में गतिरोध लगातार चलता रहेगा।

(ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।) 

 

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