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ध्यान का अर्थ एकाग्रता नहीं है। ध्यान का अर्थ है सजगता। जितना चित्त जागेगा, उतना ही ज्यादा भीतर प्रवेश होगा। जितना चित्त जागेगा, उतना ही विचार विसर्जित हो जाएंगे। जैसे ही आप जागेंगे, एक क्षण को भी जाग


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