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माघ मास में पड़ने वाली अमावस्या इस बार शनिवार को है। पितरों को प्रसन्न करने का यह अद्भुत संयोग बताया जा रहा है। मान्यता है कि जो व्यक्ति शनि ग्रह से पीड़ित हैं उसके लिए यह अमावस्या कल्प वृक्ष के समान फल देने वाली है। तीर्थ नैमिषारण्य में माघ मास की अमावस्या पर्व शनिवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार यह महीना बहुत ही पवित्र माना जाता है। इस दिन तीर्थ अथवा पवित्र जलाशय में स्नान करने का बहुत बड़ा महत्व है।  21 जनवरी को सुबह 6:18 बजे से लेकर पूर्लषाढा नक्षत्र और हर्षण योग का अद्भुत संयोग पड़ रहा है।

पूजा- विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इस दिन पवित्र नदी या सरवोर में स्नान करने का महत्व बहुत अधिक होता है। आप घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। 
  • स्नान करने के बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
  • सूर्य देव को अर्घ्य दें।

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  • अगर आप उपवास रख सकते हैं तो इस दिन उपवास भी रखें।
  • इस दिन पितर संबंधित कार्य करने चाहिए। 
  • पितरों के निमित्त तर्पण और दान करें। 
  • इस पावन दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें।
  • इस पावन दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है।
  • इस दिन विधि- विधान से भगवान शंकर की पूजा- अर्चना भी करें।

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माघ अमावस्या का महत्व-

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ अमावस्या का बहुत अधिक महत्व होता है।
  • इस पावन तिथि पर पितर संबंधित कार्य करने से पितरों का आर्शीवाद प्राप्त होता है। 
  • इस पावन दिन दान करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है।



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