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रक्षाबंधन के बाद अब श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मुहूर्त को लेकर भी भ्रम की स्थिति बन गई थी। परंतु इस पर्व की तिथि को लेकर बने संशय को दूर कर दिया गया है। इस बार श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का त्योहार दो दिन मनेगा। मध्याह्न व्यापिनी अष्टमी होने के कारण स्मार्त (गृहस्थ) 19 अगस्त को व्रत रखेंगे। जबकि वैष्णव मतावलंबी 20 अगस्त को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएंगे।

जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर के अंत में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, दिन बुधवार को अर्द्धरात्रि को रोहिणी नक्षत्र वृष राशि के चंद्रमा में हुआ था। पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु के दशावतारों में से सर्व प्रमुख सोलह कलाओं से युक्त पूर्णावतार माना जाता है।

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तिथि को लेकर आचार्यों का मत : आचार्य श्रीकृष्णानंद जी पौराणिक ‘शास्त्रीजी व ज्योतिषाचार्य पं. मुन्ना जी चौबे समेत अन्य विद्वतजनों का मत है कि इस बार यह पर्व दो दिन मनाना श्रेयस्कर होगा। क्योंकि भाद्र पद कृष्ण अष्टमी तिथि 18 अगस्त की अर्द्धरात्रि 12.14 बजे से शुरू होकर 19 की मध्य रात्रि 1.06 बजे तक रहेगी। जबकि रोहिणी नक्षत्र 20 अगस्त की प्रात: 4.58 बजे से अगले दिन 21 को पूर्वाह्न 7.00 बजे तक रह रही है। लिहाजा उदय व्यापिनी रोहिणी के कारण श्री वैष्णव व साधु-संत 20 अगस्त को व्रत रखेंगे। जबकि तिथि आधारित अष्टमी को मानने वाले स्मार्त 19 को मनाएंगे।

व्रत का फल : आचार्यों के मुताबिक व्रत रखने से पापों की निवृत्ति व सुखादि की वृद्धि होती है तथा अंत में बैकुंठ में स्थान प्राप्त होता है। जो इस व्रत को नहीं करते उनको पाप लगता है। पुत्र की इच्छा रखने वाली स्त्रियों को पुत्र, धन कामना वालों को धन की प्राप्ति होती है। यहां तक कि इस व्रत से कुछ भी पाना असंभव नहीं रहता।

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