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नए साल की पहली पूर्णिमा छह जनवरी को है। पौष पूर्णिमा से प्रयागराज में माघ मेले (कल्पवास) का आरंभ हो जाता है। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि माघ मास में तीर्थ स्थान पर स्नान करने से मनुष्य पापमुक्त होकर स्वर्गलोक में जाते हैं। माघ मास में दान का विशेष महत्व है। दान में तिल और कंबल से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। प्रयाग के अलावा अन्य तीर्थ स्थान पर पवित्र नदियों में स्नान का भी बहुत महत्व है।

ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि पौष पूर्णिमा छह जनवरी यानी शुक्रवार सुबह 2:14 बजे शुरू होकर सात की सुबह 4:37 बजे तक रहेगी। इसी दिन सुबह 11:33 से दोपहर 12:15 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। इस दिन ब्रह्म, इंद्र और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। इससे यह पूर्णिमा और भी खास हो गई है। पौष पूर्णिमा के दिन चंद्रमा के साथ नारायण और लक्ष्मीजी की पूजा होती है। इस दिन लोग सत्यनारायण भगवान की कथा भी सुनते हैं। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा से विशेष कृपा प्राप्त होती है। घर में खुशी, धन, संपदा आती है।

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पूजा -विधि-

  • इस पावन दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का बहुत अधिक महत्व होता है। आप नहाने के पानी में गंगा जल डालकर स्नान भी कर सकते हैं। नहाते समय सभी पावन नदियों का ध्यान कर लें।
  • नहाने के बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। 

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  • अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें।
  • सभी देवी- देवताओं का गंगा जल से अभिषेक करें। 
  • पूर्णिमा के पावन दिन भगवान विष्णु की पूजा- अर्चना का विशेष महत्व होता है। 
  • इस दिन विष्णु भगवान के साथ माता लक्ष्मी की पूजा- अर्चना भी करें। 
  • भगवान विष्णु को भोग लगाएं। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को भी शामिल करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। 
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें।
  • इस पावन दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का अधिक से अधिक ध्यान करें। 
  • पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। 
  • चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा की पूजा अवश्य करें। 
  • चंद्रमा को अर्घ्य देने से दोषों से मुक्ति मिलती है। 
  • इस दिन जरूरतमंद लोगों की मदद करें। 
  • अगर आपके घर के आसपास गाय है तो गाय को भोजन जरूर कराएं। गाय को भोजन कराने से कई तरह के दोषों से मुक्ति मिल जाती है।

स्नान- दान का समय- 6 जनवरी, 2023 को 02:29 ए एम बजे से प्रारंभ।



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