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भले ही श्रावण पूर्णिमा का मान दो दिन हो रहा हो लेकिन रक्षाबंधन का पर्व मनाने की दृष्टि से 11 अगस्त की तारीख शास्त्र सम्मत है। धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु आदि धर्मग्रंथों में दिए आख्यानों के आधार पर इस वर्ष 12 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व मनाना उचित नहीं होगा। भद्रा की अविध अत्यधिक लंबी होने के कारण पूर्ण शुभ मुहूत रात्रि 08:25 के बाद मिलेगा लेकिन तीन प्रहर बीतने के बाद भद्रा शुभफलदायी हो जाएगी। ऐसे में प्रदोष काल में भी रक्षाबंधन आरंभ किया जा सकता है।

भृगु संहिता विशेषज्ञ पं. वेदमूर्ति शास्त्री के अनुसार रक्षाबंधन के लिए उदयातिथि की पूर्णिमा अशुभ मानी जाती है। 11 अगस्त को पूर्णिमा तिथि की शुरुआत सुबह 09:35 बजे से ही भद्रा आरंभ हो जाएगी। उस दिन चंद्रमा मकर राशि में रहेगा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार चंद्रमा यदि कन्या, तुला, धनु और मकर राशि में से किसी एक में रहता है तो उस दिन पाताल में भद्रा होती है। पाताली भद्रा तीन प्रहर के बाद धरती पर शुभफलदायी हो जाती है।

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इस आधार पर प्रदोषकाल में शाम 5 से 6 बजे के बीच रक्षाबंधन किया जा सकता है। ऋषिकेष पंचांग के अनुसार भद्रा की समाप्ति रात 08:25 बजे होगी। वहीं विश्व पंचांग के अनुसार भद्रा की शुरुआत सुबह 09:44 बजे होगी और समापन रात्रि 8:34 बजे होगा। मारवाड़ी समाज के लोग सूड़ जिमाने की परंपरा का निर्वाह भी प्रदोष काल में कर सकते हैं।

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