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रक्षाबंधन का पर्व पर इस बार 12 अगस्त को मनाया जाएगा। मुरादाबाद में स्थित मां पीतांबरा ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र के प्रमुख आचार्य ओम शास्त्री महाराज ने बताया कि रक्षाबंधन को लेकर इस बार शंका बनी हुई है। लिहाजा इस बार रक्षाबंधन का पर्व 12 अगस्त को मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस बार भद्रा के चलते बहनें राखी के त्यौहार को लेकर दुविधा में हैं।

आचार्य ओम शास्त्री महाराज ने बताया कि सावन पूर्णिमा 11 अगस्त को 10:38 से पूर्णिमा तिथि से शुरू होगी और 12 अगस्त को सुबह 7:06 पर समाप्त हो जाएगी। पूर्णिमा के साथ ही भद्रा तिथि लग रही है। 11 अगस्त को रात में 8:53 तक भद्रा की स्थिति रहेगी। 12 तारीख को सूर्य उदय के समय पूर्णिमा तिथि रहेगी और इस दिन पूरे दिन पूर्णिमा का वास माना जाएगा। लिहाजा सभी भाई-बहन पूरे दिन रक्षाबंधन का त्यौहार मना सकते हैं। 12 अगस्त को पूर्णिमा तिथि होने के कारण रक्षाबंधन का पर्व भी 12 अगस्त को मनाया जाना श्रेष्ठ होगा।

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रक्षाबंधन की पौराणिक कथा…

धार्मिक कथाओं के अनुसार जब राजा बलि ने अश्वमेध यज्ञ करवाया था तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग धरती दान में मांग ली थी। राजा ने तीन पग धरती देने के लिए हां बोल दिया था। राजा के हां बोलते ही भगवान विष्णु ने आकार बढ़ा कर लिया है और तीन पग में ही पूरी धरती नाप ली है और राजा बलि को रहने के लिए पाताल लोक दे दिया।

तब राजा बलि ने भगवान विष्णु से एक वरदान मांगा कि भगवन मैं जब भी देखूं तो सिर्फ आपको ही देखूं। सोते जागते हर क्षण मैं आपको ही देखना चाहता हूं। भगवान ने राजा बलि को ये वरदान दे दिया और राजा के साथ पाताल लोक में ही रहने लगे।

भगवान विष्णु के राजा के साथ रहने की वजह से माता लक्ष्मी चिंतित हो गईं और नारद जी को सारी बात बताई। तब नारद  जी ने माता लक्ष्मी को भगवान विष्णु को वापस लाने का उपाय बताया। नारद जी ने माता लक्ष्मी से कहा कि आप राजा बलि को अपना भाई बना लिजिए और भगवान विष्णु को मांग लिजिए।

नारद जी की बात सुनकर माता लक्ष्मी राजा बलि के पास भेष बदलकर गईं और उनके पास जाते ही रोने लगीं। राजा बलि ने जब माता लक्ष्मी से रोने का कारण पूछा तो मां ने कहा कि उनका कोई भाई नहीं है इसलिए वो रो रही हैं। राजा ने मां की बात सुनकर कहा कि आज से मैं आपका भाई हूं। माता लक्ष्मी ने तब राजा बलि को राखी बांधी और उनके भगवान विष्णु को मांग लिया है। ऐसा माना जाता है कि तभी से भाई- बहन का यह पावन पर्व मनाया जाता है।

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