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रक्षा बंधन के त्योहार को लेकर शहरवासियों में संशय बना हुआ है। 11 और 12 अगस्त दोनों दिन रक्षा बंधन मनेगा। दोनों दिन को लेकर पंडितों की अलग-अलग राय है। सावन पूर्णिमा के दिन यह त्योहार मनाया जाता है। इस बार पूर्णिमा 11 अगस्त की सुबह 9.35 बजे प्रवेश कर जाएगा, जो 12 अगस्त की सुबह 7.16 बजे तक रहेगा। लेकिन 11 अगस्त की रात 8.25 बजे तक भद्रा है। नतीजतन इस दिन रक्षाबंधन का शुभ योग नहीं है। 11 अगस्त की रात 8.25 के बाद भद्रा का समापन हो जाएगा। 

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इसके उपरांत बहनें भाइयों को राखी बांध सकेगी। लेकिन रात में यह त्योहार नहीं मनता है। क्योंकि राखी बांधने और बंधवाने के लिए ज्यादातर भाई-बहन उपवास में रहते हैं। इसलिए दूसरे दिन 12 अगस्त को उदया मान कर रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाएगा। यह जानकारी ज्योतिषाचार्य डॉ. सुधानंद झा ने दी। उन्होंने बताया कि 12 अगस्त को भले ही पूर्णिमा सुबह 7.16 बजे ही खत्म हो जाएगी, लेकिन जिसका उदय, उसी का अस्त की मान्यता है। इसलिए 12 अगस्त को दिन भर बहनें भाइयों को राखी बांध सकेंगी। काशी और मिथिला पंचांग दोनों में रक्षा बंधन का शुभ योग 12 अगस्त को ही है। उन्होंने बताया कि भद्रा में रक्षा बंधन और होलिका दहन निषिद्ध रहता है।

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रक्षा बंधन के लिए शुभ योग भद्रा के बाद होता है। इस बार हर्ष योग में रक्षा बंधन का त्योहार होगा। हर्ष योग से आशय है कि अनिष्ट का निवारण और अच्छाई का प्रवेश। यह योग भाई-बहन के लिए काफी शुभ होता है। वहीं निर्णय सिंधु पुराण के मुताबिक, अगर चतुर्दशी और पूर्णिमा तिथि का मेल हो रहा है तो उस दिन रक्षाबंधन होगा। पूर्णिमा और प्रतिपदा तिथि का अगर मेल होता है तो उस दिन रक्षा बंधन मनाना वर्जित है। इसलिए 11 अगस्त हो रक्षा बंधन मनाना शास्त्रत्त् सम्मत होगा।

 

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