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कुंडली और हाथ में केतु क्षेत्र का बेहद खास माना गया है। यह पर्वत व्यक्ति के जीवन को व्यापक रूप से प्रभावित करता है। यदि हथेली में केतु पर्वत विकसित है या अविकसित हो तो यह जीवन में कई तरह के संकेत देता है। हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार हथेली में केतु पर्वत का स्थान मणिबंध के ऊपर और शुक्र और चंद्र के बीच होता है। व्यक्ति के जीवन में केतु का प्रभाव सुख-सुविधाओं और प्रगति को प्रभावित करता है। इस ग्रह की दृष्टि जातक के जीवन पर पांच वर्ष से बीस वर्ष तक रहती है। 

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हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार अगर जातक के हाथ में केतु पर्वत विकसित है और भाग्य रेखा भी साफ़ है तो ऐसा व्यक्ति जीवन में सभी सुखों का भोग करता है। इस तरह के लोगों को जीवन में खूब मान-सम्मान मिलता है।  ऐसे लोग गरीब घर में जन्म लेने के बाद भी जीवन में उंचाइयों को छूता है। अगर व्यक्ति के हाथ में केतु पर्वत कमजोर हो और भाग्य रेखा भी अच्छी ना हो तो जातक अपने जीवन में बहुत ज्यादा तरक्की नहीं कर पाता। ऐसे लोगों को अपने यौवन काल तक का जीवन गरीबी में गुजारना पड़ता है। अगर जातक के केतु पर्वत पर क्रॉस का चिह्न हो तो व्यक्ति में बचपन में बीमार अधिक रहता है। इसकी वजह से उसकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है। 

(इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

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