सप्तमं कालरात्रीति


सभी पाठकों को सादर प्रणाम हम सभी नवरात्र के पूजा के क्रम में नवरात्र पूजा का विश्लेषण कर रहे है जिसमे आज हम सातवे दिन की देवी कालरात्रि देवी के रहस्यों को जानने का प्रयास करेंगे –

सर्वप्रथम यह जानना आवश्यक है कि कालरात्री देवी के नाम का क्या अर्थ है इनकी उत्पत्ति कैसे हुई और इनको कैसे हम प्रसन्न कर सकते है ।

मां कालरात्रि की पूजा करने से काल का नाश होता है. इसी वजह से मां के इस रूप को कालरात्रि कहा जाता है. असुरों के राजा शुम्भ और निःशुम्भ के दूत रक्तबीज का वध करने के लिए देवी दुर्गा ने अपने तेज से इन्हें उत्पन्न किया था । इनका एक नाम शुभंकरी भी है । मा का स्वरूप भयंकर और डरावना है परंतु शुभफल को देने वाला है इसलिए इन्हें शुभंकरी कहते है । जब स्वयं दुर्गा जी को आसुरो को मारने में समस्या का सामना करना पड़ा तो माँ ने इनको अपने शरीर मे से आवाहित किया और इन्होंने असुरो को मार कर उन्हें प्रसन्न किया इस प्रकार ये माँ का ही एक रूप है ।

इनकी आराधना करने से मनुष्य को किसी प्रकार का तंत्र मंत्र और जादू टोना का प्रकोप नही रहता है । जहां स्वच्छता रहती है वहा इनका वास होता है । इसलिए इनकी पूजा में विशेष स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए।

आज नवरात्र के आशीर्वाद क्रम में तीसरा दिन है आज के दिन माँ कालरात्रि से स्वयं के और अपने परिवार के ऊपर होने वाले तंत्र मंत्र और नजर दोष को दूर करने का आशीर्वाद मिलता है और इनकी पूजा करने से ये समस्त दोष स्वतः समाप्त हो जाते है । इनका नाम लेने मात्र से व्यक्ति भय से मुक्त हो जाता है ।

NOTE- www.onlinekashipandit.com को इस लेख को लिखने का उदेश्य यह है की आप माँ को किसी मूर्ति कलश या फोटो में न देखे अपितु अपने शरीर में अपने आसपास महसूस करे क्योंकि हम माँ कीस्थापना मूर्ति में तो करते ही है और साथ साथ उर्पयुक्त भाव से अपने मन , बुद्धि , वाणी एवं शरीर के अंदर भी स्थापित करे जिससे कभी भी हमें गलत कार्य न हो

कल के लेख में मा महागौरी जी की रहस्य को जानने का प्रयास करेंगे

जय माता दी

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